उत्तराखंड में भी अग्निपथ भर्ती योजना का विरोध, सड़क पर उतरा युवाओं का हुजूम, जमकर प्रदर्शन

देहरादून: उत्तराखंड में भी ‘अग्निपथ योजना’ का विरोध शुरू हो गया है. सरकार की ओर से अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों को भर्ती कराए जाने को लेकर युवाओं में आक्रोश है. आक्रोशित युवा सरकार से अस्थाई ओवरड्राफ्ट को हटाकर स्थाई रूप से पूर्व की तरह सेना में भर्ती कराने की मांग कर रहे हैं. युवाओं का कहना है कि, बीते 2 साल से भर्ती नहीं हुई है. हजारों युवा आर्मी भर्ती की तैयारी में जुटे हुए थे, उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही आर्मी की भर्ती होगी लेकिन केंद्र सरकार ने उनके साथ धोखा करते हुए 4 साल की अग्निपथ योजना को लांच किया.

आज युवाओं ने देहरादून, पिथौरागढ़, चम्पावत, बागेश्वर, खटीमा, टनकपुर, बाजपुर समेत प्रदेश में कई जगहों पर प्रदर्शन कर योजना को वापस लेने की मांग उठाई. सेना भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं ने सड़क पर आकर योजना का जमकर विरोध कर सड़कें जाम कीं. मैदान से लेकर पहाड़ तक युवाओं में सरकार के फैसले को लेकर गुस्सा देखते ही बन रहा है. कई जगह युवाओं ने आक्रोश जताते हुए जुलूस निकाला. देहरादून में नई स्कीम अग्नीपथ के विरोध में युवाओं ने फौजी अंदाज में डिप्स मारकर इस स्कीम का विरोध किया और कहा कि, ये रोजगार नहीं युवाओं को बहला-फुसलाकर बेरोजगार करने की स्कीम है.

देहरादून में युवाओं ने भाजपा की ओर से शहर के विभिन्न इलाकों में लगाए गए पोस्टरों, बैनरों को फाड़ डाला और केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. बेरोजगार संगठन से जुड़े युवाओं का कहना है कि यह रोजगार के नाम पर एक छलावा है. खटीमा में युवाओं ने तहसील प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा और इस योजना को जल्द से जल्द वापस लिए जाने की मांग की. आक्रोशित युवाओं ने कहा कि, पिछले 2 साल से वह सेना भर्ती की लिखित परीक्षा का भी इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने लिखित परीक्षा को रद्द कर पूरे देश में अग्निपथ योजना को लागू कर दिया है जो कि देश के युवाओं के विरोध में है. युवाओं ने केंद्र सरकार के पुतले को भी आग के हवाले कर दिया.

अग्निपथ योजना का विरोध करते हुए युवाओं ने कहा कि, सरकार युवाओं के हाथों से रोजगार का एक बड़ा अवसर छीन रही है. खासकर पर्वतीय क्षेत्र के युवाओं के लिए सेना ही रोजगार का एक बड़ा माध्यम रहा है. इससे पहाड़ के युवाओं को बेरोजगारी का सामना करना पड़ेगा. अग्निवीर योजना में भर्ती होने वाले युवाओं में से 75 प्रतिशत को चार साल बाद घर लौटना होगा.

चम्पावत में आक्रोशित युवाओं ने सरकार से योजना को निरस्त कर पूर्व की भांति सेना भर्ती जारी रखने की मांग की. बाद में युवा गोल्ज्यू दरबार पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई. युवाओं ने दो साल पूर्व हुई भर्ती में सफल अभ्यर्थियों को अब तक सेना में शामिल न करने पर भी रोष जताया. उन्होंने दो साल पहले हुई सेना भर्ती में फिजीकल और मेडिकल पास युवाओं को कॉल लेटर जारी न करने पर भी आक्रोश जताते हुए कहा कि, भर्ती हुए कई युवाओं की उम्र अंतिम पड़ाव में है, परंतु सरकार को उनके भविष्य की चिंता नहीं है.

गौर हो कि, भारतीय सेना में उत्तराखंड के जवानों की तादाद काफी ज्यादा है. आजादी के बाद से ही भारतीय सेना में उत्तराखंड की भागीदारी रही है. यही कारण है कि कई बड़े सैन्य अधिकारी आज भी भारतीय सेना में उच्च पदों पर विराजमान हैं या तो देश सेवा से रिटायर्ड हो चुके हैं. इसके अलावा गढ़वाल और कुमाऊं रेजिमेंट के नाम कई उपलब्धियां भी हैं. उत्तराखंड में सेना की तीन रेजीमेंट हैं. पौड़ी गढ़वाल जिले के लैंसडाउन में गढ़वाल रेजीमेंट का हेड क्वार्टर है. अल्मोड़ा जिले के रानीखेत में कुमाऊं रेजीमेंट का हेड क्वार्टर है. नागा रेजीमेंट का हेड ऑफिस अल्मोड़ा में है.

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